Monday, April 20, 2009

यू. के. डी. का हश्र

उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना जिन उद्देश्यों को लेकर हुई थी, लगता है बिपिन त्रिपाठी के साथ ही उनका अंत हो गया। इस चुनाव की बात की जाए तो नारायण सिंह जन्तवाल ने हाँ -ना , हाँ- ना के चक्कर में बहुत देर कर दी. सरकार में हिस्सा लेने के बाद वह उंगली पकड़कर पहुँचा पकड़ना चाहती थी। किंतु बी जे पी एक राष्ट्रीय दल है , इस तरह हाथ आई सीटों पर भला वह क्यों तालमेल करने लगी? इस चुनावों में मिले प्रतिशत के आधार पर उत्तराखंड क्रांति दल अपनी स्थिति भली-भांति जांच लेगा और दिवाकर भट्ट जो इस समय त्यागपत्र का खुला ढोंग रचकर जनता को धोखा देना चाहते हैं; या तो मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे या फ़िर रजनी रावत की तरह किसी के पल्लू में जा छुपेंगे। दिवाकर जैसे और भी कई मौकापरस्त इस छोटे राज्य की बड़ी चुनावी चकल्लस से गहरा सरोकार रखते हैं। इन्हें देखकर ही मुझे सहसा मुलुक कुमाऊँ के द्वाराहाट के बैल याद आ गए। आरे; मेरे दोस्तों आपने क्या दौर्हटिया बैल की कहानी नहीं सुनी जिसने पानी पीने की प्रतियोगिता में पानी से अपना मुंह तो सटाए रखा लेकिन पिया नहीं। बेचारा दूसरे मुलुक का बैल पानी पी- पी कर मर गया। तो बात इतनी सी है कि अपने मुलुक के बैल भी पानी पिला- पिला कर मारते हैं, फ़िर ये तो नेता ठहरे । आगे देखते हैं, ऊँट किस करवट बैठता है ..............

Wednesday, April 15, 2009

sri GANESH

द्वाराहाट अपने मुलुक का एक सुविख्यात न सही कम से कम अपने मंदिरों के लिए तो प्रसिद्ध गाँव है ही.इसके बैल भी कम प्रसिद्ध नहीं। अपने ब्लॉग का श्रीगणेश चुनावों की इस पावन बेला में बैलों और चुनावी-चर्चा के रिश्ते से करूँगा। बस कीजिये इंतज़ार .......